Monday, April 5, 2010

आज फिर उसका लिखा ख़त नज़र आया

आज फिर उसका लिखा ख़त नज़र आया
पढ़ते पढ़ते दिल फिर भर आया
बस यही सोचता रहा की आखिर क्यों
मौत को मेरा ही घर नज़र आया ...

आज उसकी लिखी वोह बातें फिर याद आई
आज फिर वोह पंक्तियाँ मैंने गुण गुनाइ
बस यही सोचता रहा की आखिर क्यों
हो गयी यह जुदाई ....

आज फिर उसकी यादों मे खो गया
जी भर कर रो गया
बस येही सोचता रहा की आखिर क्यों
मे तनहा हो गया ......

वजह जो भी हो आज बरसो बाद
मुझे अपने जिन्दा होने का एहसास हुआ

1 comment:

  1. starting is awesome but ending again negative why?

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